कविता जब लिखें तो दिल और दिमाग दोनों का प्रयोग करें.
कविता लिख कर जब कविता का मूल्याङ्कन करें तो केवल हृदय का इस्तेमाल करें तथा हृदय के निर्देश अनुसार ही कविता को अंतिम रूप प्रदान करें।
------प्रभु दयाल खट्टर

Sunday, 7 April 2019

दायित्व....

तेज धूप फिर आ धमकी है दरवाजों के पार 
गर्मी से बचाव के सब करते हैं उपचार----

कुछ  समर्थ हैं कुछ असमर्थ हैं 
कुछ जुगाड़ करते हैं 
गर्मी से वो सब डरते हैं 

जिनके बस में 
है ही नहीं गर्मी का मुकाबला करना

ऐसे पशु/पक्षिओं को 
दाना देना ,पानी देना 
देना सहारा 
कदाचित यही तो दायित्व है 
हमारा  ........

मौनिका ,दिल्ली 
१८ वर्ष 

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