कविता जब लिखें तो दिल और दिमाग दोनों का प्रयोग करें.
कविता लिख कर जब कविता का मूल्याङ्कन करें तो केवल हृदय का इस्तेमाल करें तथा हृदय के निर्देश अनुसार ही कविता को अंतिम रूप प्रदान करें।
------प्रभु दयाल खट्टर

Wednesday, 24 January 2018

मुझे वहां जाना है ...



जब से बड़ी हुई हूँ
एक पैर पर खड़ी हुई हूँ. हाथ  उठाकर ,

दरवाजा खोलो 

खोलो खिड़कियां ,कब तक 
खड़ी रहूंगी ?

पैर सिर्फ खड़ा होने के लिए नहीं,
ये चलने के लिए हैं 
इन्हे चलने दो। 

ईश्वर के लिए चलने दो इन्हें वहां तलक 

जहाँ आसमान धरती से मिलता है,
जहाँ समुद्र  में  नदी का  
जल मिलता है 

जहाँ होता है सूर्योदय उदास 

आँखों में,
------- मुझे वहां जाना है। 

स्वाति बेनीवाल 

२३ वर्ष 

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