शहर के इतने रास्तें हैं
कि साफ़ समझ में आता है,
कि यदि संभल कर न चले तो अवश्य
कोई गलत मार्ग भी
पकड़ सकते हो ...
हालाँकि सड़कों की
पहचान के लिए पटटियाँ लगी है ,
मगर इन पटटियों में
कोई पट्टी नहीं बताती
कि मेरे गाँव लौटने का मार्ग
कौन सा है... .?
शंभू नाथ
२९ वर्ष
कि साफ़ समझ में आता है,
कि यदि संभल कर न चले तो अवश्य
कोई गलत मार्ग भी
पकड़ सकते हो ...
हालाँकि सड़कों की
पहचान के लिए पटटियाँ लगी है ,
मगर इन पटटियों में
कोई पट्टी नहीं बताती
कि मेरे गाँव लौटने का मार्ग
कौन सा है... .?
शंभू नाथ
२९ वर्ष