“ वसन्त ऋतु में !
“ वसन्त ऋतु में !
यूं धीरे– धीरे सदियों का सर्दियों का जाना,
गुनगुनी धूप का आना
सूखे पत्तों का झड़ना
नए पत्तों का सृजन होना
सरसों के फूलों की सुगंध में
प्रकृति स्वयं को अपने रंगो में घोलती
उस रंगों की गुदगुदाहट में
गेहूं की बालियों का आना
किसानों का प्रफुल्लित मन
देखकर लगता हैं मानो!
कोई युवती अठारह बरस की हुईं हैं।
यह मोहक छवि
अम्बर तक फैली धानी चूनर सी लगती हैं ।।"
वसन्त ऋतु एवम् वसन्त पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी को ।
रेशमा त्रिपाठी
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश।
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