कविता जब लिखें तो दिल और दिमाग दोनों का प्रयोग करें.
कविता लिख कर जब कविता का मूल्याङ्कन करें तो केवल हृदय का इस्तेमाल करें तथा हृदय के निर्देश अनुसार ही कविता को अंतिम रूप प्रदान करें।
------प्रभु दयाल खट्टर

Tuesday, 25 June 2019

‘राख’ होने का वर दो

      
“ किसी के आँगन की ज्योति हूॅ॑ 
        वर दो !
किसी की अग्निमयी शिखा हूॅ॑
         लौ दो!

किसी की ज्वाला कोष हूॅ॑
  स्वप्न की मधुशाला दो!
किसी के आखों का ख्वाब हूॅ॑
   पुतलियाॅ॑ अंगार  दो!

प्राण कैंसे बचाएं
कठिन है!
अग्नि तुम
 समाधि दो!

किसी की मृत्यु हूॅ॑
वर दो !
दीप से दृगों में
प्यार का कण दो!

 क्षार हूॅ॑ शिथिलता  की 
अब..!
पिघलने का वर दो!

किसी के दुखों की वजह न बनूं
नाथ ...
राख’ होने  का वर दो!"

रेशमा त्रिपाठी
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश
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