कविता जब लिखें तो दिल और दिमाग दोनों का प्रयोग करें.
कविता लिख कर जब कविता का मूल्याङ्कन करें तो केवल हृदय का इस्तेमाल करें तथा हृदय के निर्देश अनुसार ही कविता को अंतिम रूप प्रदान करें।
------प्रभु दयाल खट्टर

Monday, 10 June 2019

बरखा रानी आ जाओ -

गर्मी की धूप बड़ी भारी  है ,
तप रही यह धरती सारी  है. 

पंछी परेशान हैं प्यास से
पशु निकलें न आवास से ,
मुरझाई जंगल झाडी  है ,
गर्मी की धूप बड़ी भारी है 

वृक्ष उदास खड़े हुए हैं 
फूल मूर्छित पड़े  हुए हैं  
बरखा रानी आ जाओ -
प्रतीक्षारत दुनियां सारी है। 

गर्मी की धूप बड़ी भारी  है ,

तप रही यह धरती सारी  है. 

प्राप्ति मंडल ,
कोलकता 
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