गर्मी की धूप बड़ी भारी है ,
तप रही यह धरती सारी है.
पंछी परेशान हैं प्यास से
पशु निकलें न आवास से ,
मुरझाई जंगल झाडी है ,
गर्मी की धूप बड़ी भारी है
वृक्ष उदास खड़े हुए हैं
फूल मूर्छित पड़े हुए हैं
बरखा रानी आ जाओ -
प्रतीक्षारत दुनियां सारी है।
गर्मी की धूप बड़ी भारी है ,
तप रही यह धरती सारी है.
प्राप्ति मंडल ,
कोलकता
तप रही यह धरती सारी है.
पंछी परेशान हैं प्यास से
पशु निकलें न आवास से ,
मुरझाई जंगल झाडी है ,
गर्मी की धूप बड़ी भारी है
वृक्ष उदास खड़े हुए हैं
फूल मूर्छित पड़े हुए हैं
बरखा रानी आ जाओ -
प्रतीक्षारत दुनियां सारी है।
गर्मी की धूप बड़ी भारी है ,
तप रही यह धरती सारी है.
प्राप्ति मंडल ,
कोलकता