कविता जब लिखें तो दिल और दिमाग दोनों का प्रयोग करें.
कविता लिख कर जब कविता का मूल्याङ्कन करें तो केवल हृदय का इस्तेमाल करें तथा हृदय के निर्देश अनुसार ही कविता को अंतिम रूप प्रदान करें।
------प्रभु दयाल खट्टर

Friday, 26 January 2018

तरक्की और मैं....




बापू ने तांगे वाला  बन कर 
 जीवन भर 
हमें पाला पोसा  

बहुत मुश्किल से 
पढ़ाया लिखाया 

ये सोचकर कि पढाई से बच्चों की 
तरक्की  आएगी 

मगर वो तो तभी आएगी 
जब नौकरी होगी 

बेरोजगारी से घर  में 
तरक़्क़ी  कैसे आवेगी

अम्मा ने हुकुम सुना दिया है 
नौकरी नहीं है तो तांगा  चला 

 पढ़ लिख कर 
 तांगे वाले  का काम हमसे 
 कैसे होगा  ?

बापू हतप्रभ है 
मैं  किकर्तव्यविमूढ़

रमई प्रसाद ,आगरा 
२२ वर्ष 
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