कविता जब लिखें तो दिल और दिमाग दोनों का प्रयोग करें.
कविता लिख कर जब कविता का मूल्याङ्कन करें तो केवल हृदय का इस्तेमाल करें तथा हृदय के निर्देश अनुसार ही कविता को अंतिम रूप प्रदान करें।
------प्रभु दयाल खट्टर

Thursday, 8 October 2020

मेरे दिल के घरौंदे में आओं कभी....

 सूफियाना हुआ दिल

सूफियाना हुआ दिल मचलने लगे हम। तेरी याद में नगमे पढ़ने हम ।।
कैसे बताए क्या चाहते हम । तेरी खुशबू में जो महकने लगे हम ।। सूफियाना........
तेरे जुल्फों की घनी छांव में । दबी उंगलियों संग उलझने लगे हम।। तेरी याद में.....
मेरे दिल के घरौंदे में आओं कभी थोड़ा बहक जाऊं मैं भी तेरे आगोश में सूफियाना ......
मैं भी बंजर हूं ,बेकार सा थोड़ी उग जाओं तुम भी मौसमी पौध सी... सूफियाना ......।।

रेशमा त्रिपाठी प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश
Seen by Reshma Tripathi Raj Tripathi at 9 August 2020 at 20:24
नमस्कार मित्रो। नवोदित कवि और उनकी कविताएं ', इस ब्लॉग मेंआपका स्वागत है। हिंदी कविता लेखन में पदार्पण करने वाले नए कवियों की कवितायेँ इस ऑनलाइन पत्रिका में आमंत्रित है। रचनाएँ भेजते समय एक प्रमाण पत्र भेजें जिसमें लिखें कि भेजी जा रही रचना मौलिक है तथा कहीं प्रकाशित नहीं हुई है साथ ही ये भी लिखें कि रचना के सर्वाधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं रचना ब्लॉग में प्रकाशित होने पर कोई पारिश्रिमिक नहीं दिया जाएगा। कवि की आयु 18 वर्ष से लेकर 30 वर्ष के बीच होनी चाहियें। ब्लॉग का उद्द्शेय है नवोदित कविओं को प्रोत्साहन देना। रचना की विषय वस्तु विवादरहित होनी चाहिए तथा कविता किसी मनुष्य धर्म,जाति या किसी राजनितिक पार्टी के समर्थन या विरोध में नहीं होनी चाहिये। कविता हर हाल में जीवन में आशा तथा पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देने और संघर्षों का मुकाबला करने की प्रेरणा देने वाली होनी चाहिए। रचनाएँ भेजते समय अपना पूरा पता, फ़ोन नंबर तथा अपना संक्षिप्त परिचय भी लिख कर भेजें। रचना स्वीकृत होने पर ही प्रकाशित की जाएँगी। यदि एक माह के भीतर रचना प्रकाशित ना हो तो वह अस्वीकृत समझी जाये। रचना की विषय वस्तु के प्रति हर तरह की जिम्मेदारी लेखक की होगी प्रकाशक या संपादक उसके लिए जिम्मेदार नहीं समझा जाये .ब्लॉग की नीति से मेल ना खाने वाली रचनाएँ प्रकाशित नहीं की जाएँगी। रचनाएँ केवल इ मेल से ही भेजी जाएँ। हमारा इ मेल का पता है; kpk570@yahoo.com