“आज न जाने क्यों?
आज दिल मुस्कुराने को कह रहा हैं
किसी ने कोई तोहफा न दिया हैं
न पीठ थपथपाई हैं
फिर भी न जाने क्यों ?
आज दिल मुस्कुराने को कह रहा हैं
कोई हसरत न पूरी हुई हैं
न कोई अच्छा ख्वाब देखा हैं
फिर भी न जाने क्यों ?
आसमा में उड़ने का दिल कर रहा हैं
गम भी वही हैं
तन्हाई भी वही हैं
अपनों से मिले तिरस्कार की टीस भी वही हैं
समाज के दोगले चेहरों की बात भी वही हैं
फिर भी ना जाने क्यों ?
आज दिल मुस्कुराने को कह रहा हैं
कई बार खुद को रोका मुस्कुराने से
फिर भी मुस्कान आ ही गई होठों पर
बहुत देर बाद समझ आया
यह न्यूज़ चैनल के सुर्खियों से आई न्यूज की थी (हैदराबाद)
जो दुःख की घड़ी में भी
हर स्त्री के होठों पर मुस्कान की लालिमा बिखेर गई
शायद
इसलिए आज दिल मुस्कुराने को कह रहा हैं
खुले आसमान में उड़ने को कह रहा हैं ....।।"
रेशमा त्रिपाठी
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश
