बारिश के मौसम में
छात्ता लेकर दौड़ पड़ता हूँ यदा कदा
सुरक्षित होकर निकल जाता हूँ घर की और
परन्तु उसी बारिश में
किसी
जंतु को भीगते छटपटाते
देख
मेरा जीवन से लड़ने के प्रति
उत्साह समाप्त हो जाता है
जब पाता हूँ स्वयं को असहाय
उस मूक जानवर को
मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए। ..
नारायण शिंदे सांगली